Ganesh Chaturthi 2024: मुहूर्त से विसर्जन तक का सफर, तमिलनाडु की विशिष्ट परंपराओं के साथ

By: Jeet

On: Friday, September 6, 2024 10:03 AM

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Ganesh Chaturthi 2024: मुहूर्त से विसर्जन तक का सफर, तमिलनाडु की विशिष्ट परंपराओं के साथ

गणपति बप्पा मोरया!

Ganesh Chaturthi 2024

परिचय

गणेश चतुर्थी भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक है, जो ज्ञान और समृद्धि के देवता भगवान गणेश के जन्म का प्रतीक है। यह पर्व खासतौर पर महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाता है। जैसे-जैसे Ganesh Chaturthi 2024  नज़दीक आ रही है, आइए जानते हैं इस पावन अवसर से जुड़ी खास बातें जैसे Ganesh Chaturthi 2024 मुहूर्त , मुख्य अनुष्ठान और इसका महत्व।

Ganesh Chaturthi 2024 मुहूर्त: कब है सही समय?

Ganesh Chaturthi 2024 कब है? इस साल, Ganesh Chaturthi 2024  सोमवार, 9 सितंबर 2024 को मनाई जाएगी। त्योहार की शुरुआत गणेश प्रतिमा की स्थापना से होती है, जिसे गणेश स्थापना कहा जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, यह भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है।

गणेश स्थापना मुहूर्त Ganesh Chaturthi 2024 सुबह 10:23 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक का है। यह समय भगवान गणेश की प्रतिमा घर या सार्वजनिक पंडाल में स्थापित करने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

गणेश चतुर्थी: क्यों है खास?

गणेश चतुर्थी, जिसे विनायक चतुर्थी भी कहा जाता है, भगवान गणेश के जन्म का पर्व है। इसे पूरे भारत में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है, खासतौर पर महाराष्ट्र में। इस दिन की खासियत यह है कि भगवान गणेश को विशेष प्रसाद, जैसे मोदक और लड्डू, अर्पित किए जाते हैं।

गणेश पूजा के दौरान, भक्त भगवान से बुद्धि, समृद्धि और सुख-शांति की कामना करते हैं। पूजा के पहले दिन को गणेश स्थापना कहा जाता है, जब भक्त घरों में या सार्वजनिक स्थानों पर गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं।

गणेश पूजा कैसे करें: सरल विधि

जो लोग घर में गणेश पूजा करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यहां एक सरल प्रक्रिया है:

  1. मूर्ति चयन: गणेश जी की एक सुंदर गणेश फोटो या मूर्ति चुनें, जो पर्यावरण के अनुकूल हो, ताकि विसर्जन के समय पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे।
  2. स्थापना: जैसा कि बताया गया है, गणेश स्थापना मुहूर्त 2024 में ही स्थापना करें।
  3. भोग: फल, फूल, मिठाई और मोदक जैसे प्रसाद तैयार करें, जो भगवान गणेश के प्रिय हैं।
  4. पूजा विधि: संकल्प के साथ पूजा प्रारंभ करें, उसके बाद दूर्वा, फूल और प्रसाद अर्पित करें।
  5. आरती: परिवार के सभी सदस्यों के साथ आरती करें और भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करें।

विसर्जन के समय ध्यान रखें कि इसे पर्यावरण के अनुकूल तरीके से करें, क्योंकि गणेश विसर्जन इस पर्व के समापन का प्रतीक है।

विनायक चतुर्थी 2024: तमिलनाडु में उत्सव

विनायक चतुर्थी दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में बड़े उत्साह और भक्ति के साथ मनाई जाती है। इसे अन्य क्षेत्रों में गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है, लेकिन तमिलनाडु में इसे विनायक चतुर्थी कहा जाता है। तमिलनाडु के लोग भगवान गणेश को बेहद श्रद्धा के साथ पूजते हैं, और इस पर्व को मनाने की उनकी परंपराएं और रीति-रिवाज कुछ हद तक भिन्न होते हैं। यहां पर इस त्यौहार को कैसे मनाया जाता है, इस पर विस्तार से जानते हैं:

तमिलनाडु में गणेश पूजा की विशेषताएँ

  1. मंदिरों में विशेष पूजा: तमिलनाडु के प्रमुख मंदिरों, जैसे चेन्नई में स्थित कपालेश्वर मंदिर और अरुलमिगु श्री विग्नेश्वरर मंदिर में इस दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। यहाँ हजारों भक्त भगवान गणेश के दर्शन के लिए इकट्ठा होते हैं और कई मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं, जिनमें मंत्रोच्चारण, हवन, और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होते हैं।

  2. घरों में पूजा: अधिकांश तमिल परिवार अपने घरों में भी गणेश की मूर्ति स्थापित करते हैं। विनायक चतुर्थी के दिन घरों में सुबह-सुबह पूजा की जाती है। मूर्ति स्थापना के लिए लोग साधारण और पर्यावरण के अनुकूल मूर्तियों का चुनाव करते हैं। इसके बाद पूजा के दौरान भगवान गणेश को फूल, धूप, और विशेष प्रसाद अर्पित किया जाता है।

  3. प्रसाद का महत्व: तमिलनाडु में कोझुकट्टई (जो कि उत्तर भारत के मोदक की तरह होता है) भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है। यह चावल के आटे से बना होता है और गुड़ और नारियल से भरा जाता है। इसे गणेश जी का सबसे प्रिय भोजन माना जाता है और पूजा के बाद इसे परिवार के साथ बाँटा जाता है।

  4. सांस्कृतिक कार्यक्रम: तमिलनाडु में इस दिन कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इनमें भरतनाट्यम नृत्य प्रदर्शन, पारंपरिक संगीत कार्यक्रम, और धार्मिक प्रवचन शामिल होते हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य भगवान गणेश की महिमा का गुणगान करना और युवा पीढ़ी को सांस्कृतिक धरोहर से जोड़ना होता है।

  5. समुदाय का उत्सव: तमिलनाडु के ग्रामीण और शहरी इलाकों में सामुदायिक स्तर पर भी विनायक चतुर्थी मनाई जाती है। सार्वजनिक पंडालों में भगवान गणेश की बड़ी प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं और सामूहिक रूप से पूजा की जाती है। लोग सामूहिक आरती करते हैं और भगवान से जीवन में सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

  6. विसर्जन समारोह: तमिलनाडु में भी गणेश विसर्जन के दिन को धूमधाम से मनाया जाता है। पर्यावरण को नुकसान से बचाने के लिए यहाँ लोग मिट्टी की मूर्तियों का उपयोग करते हैं और उन्हें स्थानीय तालाबों, नदियों या समुद्र में विसर्जित किया जाता है। विसर्जन के समय भक्तगण “गणपति बप्पा मोरया” के जयकारे लगाते हुए श्रद्धा से विदाई करते हैं।


तमिलनाडु में विनायक चतुर्थी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक और सांस्कृतिक उत्सव भी है, जो लोगों को एक साथ लाता है। भक्तगण भगवान गणेश की पूजा करते हुए यह उम्मीद करते हैं कि वे उनके जीवन से सभी विघ्नों और समस्याओं को दूर करेंगे और ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद देंगे।

गणेश चतुर्थी कब की है और कहाँ कैसे मनाते हैं?

बहुत से लोग यह सवाल पूछते हैं कि गणेश चतुर्थी कब की है, और जैसा कि पहले बताया गया, यह 9 सितंबर 2024 को है। लेकिन इसे विभिन्न राज्यों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है:

  • महाराष्ट्र: यह गणेश चतुर्थी का केंद्र है, जहाँ बड़े पंडालों में विशाल गणेश प्रतिमाओं की पूजा की जाती है।
  • कर्नाटक: यहाँ लोग पारिवारिक समारोह और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ इसे मनाते हैं।
  • गुजरात: गणेश पूजा के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
  • गोवा: यहाँ गणेश चतुर्थी को पारंपरिक कोंकणी रीति-रिवाजों के साथ मनाया जाता है।
  • उत्तर भारत: दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भी इस पर्व की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है।

गणेश फोटो और डिजिटल उत्सव

सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के बढ़ते उपयोग के कारण अब गणेश चतुर्थी ऑनलाइन भी धूमधाम से मनाई जा रही है। लोग गणेश फोटो इंस्टाग्राम, फेसबुक और व्हाट्सएप पर शेयर कर त्योहार की खुशियाँ बांटते हैं। साथ ही, डिजिटल पूजा और वर्चुअल आरती भी काफी लोकप्रिय हो चुकी हैं, जिससे भक्त दुनिया के किसी भी कोने से गणेश जी की पूजा कर सकते हैं।

Ganesh Chaturthi 2024 के दौरान पर्यावरणीय जागरूकता

पिछले कुछ वर्षों में गणेश विसर्जन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान को लेकर चिंता बढ़ी है। प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियाँ पानी में घुलती नहीं हैं और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचाती हैं।

इस समस्या का समाधान करने के लिए अब मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी पर्यावरण के अनुकूल गणेश प्रतिमाएं लोकप्रिय हो रही हैं। इसके अलावा, लोग घर में बाल्टी में प्रतिमा का प्रतीकात्मक विसर्जन भी कर रहे हैं।

निष्कर्ष: Ganesh Chaturthi 2024 से क्या उम्मीद करें

Ganesh Chaturthi 2024 भक्ति, उल्लास और उत्सव से भरी होने वाली है। गणेश स्थापना से लेकर विसर्जन तक, इस पर्व के दौरान किए जाने वाले अनुष्ठान लोगों को एकजुट करते हैं। चाहे आप घर पर गणेश की पूजा करें या किसी बड़े पंडाल में जाएं, यह त्योहार हमें जीवन में ज्ञान, समृद्धि और खुशी का महत्व सिखाता है।

पर्यावरण के अनुकूल तरीके अपनाकर और डिजिटल माध्यमों से त्योहार मनाकर, हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि गणेश चतुर्थी आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण परंपरा बनी रहे।

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Jeet

Amarjeet Kumar is a Content and SEO Specialist with 5+ years of experience, having worked on 70+ websites including major platforms like Education Dunia and DDE IMTS. He has successfully ranked content on 1000+ competitive keywords across multiple niches. Amarjeet holds a Master’s degree in Labour and Social Welfare (LSW), giving him strong research, analytical, and problem-solving skills that reflect in his digital work.

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2 thoughts on “Ganesh Chaturthi 2024: मुहूर्त से विसर्जन तक का सफर, तमिलनाडु की विशिष्ट परंपराओं के साथ”

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